हुंडरु 2

 दादा आपलोग क्या बना रहे ?

 'जंगल की लकड़ियों से कुछ बना लेते हैं ' ।

आप किस जनजाति से हैं ?

' हमलोग आदिवासी ही हैं - बेदिया  '

हमारे समाज में बहुत नशा है महुआ और हंडिया पी कर सब पड़े रहते हैं ।

ओह !

आप लोग पीते हो ?

नहीं मैं बिल्कुल नहीं 

दो लोगों ने स्वीकार किया ।

ये भी बताया हमलोग जबतक जिंदा हैं तब तक ये बना रहे । हमारे बच्चे नहीं बनायेंगे ।मेरे बेटे ने आई . टी . आई की है । पन बिजली  प्लांट में काम करता है । 

मैं थोड़ी खुश और थोड़ी दु:खी हो

कुछ चीजों के पैसे पूछने लगी ।

पेंट क्यों नहीं किए ?

दाम ज्यादा होने पर लोग लेते नहीं ।

मुझे खुद पर शर्म आई 200 रूपए देकर बोली दादा जो दे सकते हो दे दो ।

थोड़ी खुशी और इस कला के ख़तम होने के भय के साथ सीढ़ियां चढने लगी ।



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