दामोदर नदी ( Patratu) खोजने होंगे नदियों के नए नाम
प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के संबंध में भारतीय समाज का कोई सानी नहीं है । भारतीय समाज की पहुंच को उसके द्वारा नदियों के नामकरण में देखा जा सकता है । नदी का मतलब ही होता है प्रवाह , भारतीय अधिकांश नदियों के नाम स्त्रियों के नाम पर हैं यानि नदी के गुण और मातृशक्ति को मान्यता देना । कुछ नदियों के ही नाम पुरुष परक है जिनमें ब्रह्मपुत्र और दामोदर प्रमुख हैं । इन नदियों की सहायक नदी बराकर, लोहित,अजय वगैरह नाम भी पुरुष वाले हैं । ध्यान देने योग्य बात है कि नदियों के प्रवाह की तेजी , तुरंत बाढ़ अा जाना इन सभी गुणों को देखते हुए बंगाल की कुछ नदियों का नाम पुरुष वाले हैं ।
नदी को समझना इतना आसान नहीं नदी का अपना भूगोल है और अपने अलग - अलग अंग । जन्मस्थान उद्गम है तो दो नदियों से मिलने का स्थान संगम। नदी का संपूर्ण शरीर उसका कछार है । नदी का प्रवाह तंत्र हमारी धमनियों के रक्त प्रवाह सरीखा ही तो होता है । नदी आगे बढ़ते जाती है उसका कैचमेंट एरिया बढ़ते जाता है ।
' बंगाल का शोक ' कही जानेवाली नदी दामोदर झारखंड के लिए ऊर्जा दायिनी है । पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली दामोदर नदी कभी अभिशाप मानी जाती थी आज इस नदी के जल से एक महत्वाकांक्षी पनबिजली परियोजना दामोदर घाटी परियोजना चलाई जाती है जिसका नियंत्रण डी वी सी करती है। दामोदर और भैरवी के संगम में आप देख सकते हैं कैसे कचरे के प्रवाह से हम नदी की धमनियों को बहने से रोक रहे हैं । नदियों में ख़ुद को साफ करने की अद्भुत क्षमता होती है। जब गंदगी ढोने से अधिक होती है तब नदियों की क्या स्थिति होती है हम सब देख रहें हैं । नदियों के नामकरण की अद्भुत सोच को बदलने के लिए तैयार रहना होगा ना मां सरीखा वात्सल्य रहा ना पुरुषों जैसा वेग , नाही बाघ जैसी नदियों की धार । हमें नदियों के नाम सूखी , गंदी नदी,बेचारी, जैसे नाम सोचने होंगे ।
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